संत सेवालाल जी के 277 वी जयंती उपलक्ष में मुंबई मे एक चर्चासत्र का आयोजन

जय गौर।
जय सेवालाल।।
जय भारत।
जय संविधान।।

।संत सेवालाल जयंती समारोह।

संत सेवालाल जी के 277 वी जयंती उपलक्ष में मुंबईमे एक चर्चासत्र का आयोजन किया गया है।

तारीख:19 फरवरी 2016
सुबह: 9 बजे से शाम 5 बजेतक

स्थल: जे पी नाईक भवन, मुंबई विश्वविद्यालय, कलिना कॅम्पस, सांताकृझ पूर्व, मुंबई-400098

विषय: क्रांतिकारी संत सेवालाल जी के बोल (बोधवचन=विचार) एवं गौर संस्कृती (गोरवट):

    ***** प्रथम सत्र *****
सभाध्यक्ष: भीमणीपुत्र मोहन नाईक
उद्घाटन: प्रा.गबरुसिंग राठोड
(अध्यक्ष, अ.भा. गौर बंजारा साहित्य संमेललन)
प्रमुख अतिथी: राजुसिंग नाईक (कार्याध्यक्ष, अ.भा.बंजारा सेवा संघ), गोविंद राठोड (सेवानिवृत आयुक्त मनपा), मंगल चव्हाण (सेवा ग्रुप)
विशेष अतिथी: रमेश बनसोड, (व्यवस्थापकीय संचालक,  वसंतराव नाईक भटके विमुक्त आर्थिक महामंडळ),  प्रा.डॉ.माधव पंडित, संदीप हनुमंत उपरे (अध्यक्ष, सत्यशोधक ओबीसी परिषद), मारुती कुंभार, मोहिनी अनावकर, धम्माचारी बोधिसेन, अब्राहम मथाई (माजी उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यांक आयोग), प्रा.डॉ.चंद्रकांत पुरी, डॉ.सुजाता पाटील

भूमिका: प्रा.डॉ.संतोष राठोड

प्रस्तावना आणि
बिजभाषण: उल्हास राठोड

प्रमुख वक्ते: आंबरसिंग चव्हाण (महासचिव, अ.भा.बंजारा समाज कर्मचारी सेवा संस्था),  मोहन राठोड (मानवतावादी संघटना), चुन्नीलाल जाधव (फुले, शाहू आंबेडकरी विचारवंत), जिजाबाई राठोड (गौर बंजारा साहित्यिक).

     ***** द्वितीय सत्र *****
              :प्रपत्र पठन:
अध्यक्ष: प्रा.शाम मुडे
प्रपत्र पाठक: प्रा.डॉ.पंडित चव्हाण, प्रा.डॉ. गणपत राठोड, याडीकार पंडित चव्हाण, प्रा.डॉ.विजय जाधव, प्रा.डॉ.प्रकाश राठोड, प्रा.रमेश राठोड, प्रा.बालदेव आडे, प्रा.डॉ.भावना राठोड, प्रा.डॉ.संतोष राठोड और अन्य…

   ***** समापन सत्र *****
अध्यक्ष: प्रा.गबरुसिंग राठोड
प्रमुख उपस्थिती: प्रा.डॉ.गोवर्धन बंजारा, माहेश्चंद बंजारा, राजा ढाले, दीपक पवार और अन्य…
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गौर भाई-भेनों/दोस्तो,

भारतमें पुरोगामी और प्रतिगामी 2 मुख्य विचारधाराएं कार्यरत है।
बुद्ध, फुले, शाहू, आंबेडकर, मार्क्स की विचारधारा पुरोगामी (अब्राह्मणी) विचार कहलाते है। पुंजीवादी और ब्राह्मणी धर्मवादी (जातीवादी, वर्णभेदी, कर्मकांड अंधविश्वासी) विचारों को प्रतिगामी विचार कहेंगे।

महान समाजसुधारक संत सेवालालजीने कौन्सी विचारधारा अपनाई ऐसा आपको लगता है? क्या हम उनकी यह विचारधारा स्वीकार करते है?
क्या वही गौर बंजारा समाज की विचारधारा है? क्या हम उनके  इन्हीं विचारोंसे चलते है?
गौर बंजारा समाज प्रकृतीपूजक आदिवासी जनजाती है। हमारी मूल संस्कृती ब्राह्मणवाद से कोसो दूर है।
इस परिप्रेक्षमे और आज के संदर्भ में हमे कोन्सी विचारधारा नजदिकी और उपयुक्त होगी?

अंततः उद्देश्य यह की गौर बंजारा समाज के उन्नती हेतु हम किस विचारधारा के संग रहें, अंतिमतः स्पष्ट करना होगा।

कृपया, समाजोन्नती हेतु अपने विचार संगठीत मंचपर रखे ताकी हम सब मिलकर समाजको सेवालालजी के विचारोंसे जागृत एवं गौर संस्कृतिसे (गोरवट) पुनःप्रेरित करेंगे।
ऐसा करने से भारत एवं विश्वमे गोरवट प्रस्थापित करने हेतु सामाजिक दायित्व का एक महान कार्य भी हमारे हाथों हो  सकता है!

इस कार्यक्रम में सभी गौर वैचारिकों ने उपस्थित रहकर क्रांतिकारी संत सेवालालजी के मानवतावादी विचारोंका उचित प्रचार करने में सहयोग करें।

सभी बुद्धिजीवी व्यक्ति और संत सेवालालजी के मानवतावादी अनुयायींयों को सूचित किया जाता है की…
इस चर्चासत्र में हिस्सा लेने इच्छुक महाभाग अपना प्रपत्र या  वक्तव्य लिखित स्वरूप में अग्रिम…
[email protected] इस मेलपर
या 9869670821 इस WhatsApp नंबरपर भेजनेकी कृपा करें।

धन्यवाद।

।।आपके भवदीय।।

*उल्हास राठोड*प्रा.डॉ.संतोष राठोड*
समन्वयक,            निमंत्रक,
बंजारा इंटिलेक्चुअल फोरम, मुंबई

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