लगभग चालीस साल पहले आंध्रप्रदेश में बंजारा लंबाडा गोरमाटी गोरबंजारा समाज को अदिवासी का दर्जा

???? यह सब क्यों ? ???? साथियों लगभग चालीस साल पहले आंध्रप्रदेश में बंजारा लंबाडा गोरमाटी गोरबंजारा समाज को अदिवासी का दर्जा दिया गया था. ऊस वक्त के आंदोलन मे, और समाज को संवैधानिक आरक्षण मिलने के लिए योगदान देने वाले अनेक मान्यवर नेता गण आज भी है. यही बात कर्नाटक की है. भूतपूर्व मुख्यमंत्री के ब्रम्हानंद रेड्डी, और देवराज अर्स जी के साथ भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी का ईसमे बहुत बडा योगदान और भुमिका है. लेकिन चालीस साल पहले मिले हुए अधिकार को गत 2/3 साल से विरोध क्यों हो रहा है.? ईस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है. ईसमे खास बात यह है कि आज गोरमाटी बंजारा समाज के अनेक राजनीतिक नेता गन विभिन्न दलो के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अलग अलग राज्य में प्रभारी है. ओबीसी विभाजन की बाते हो रही है. मध्यप्रदेश राजस्थान गुजरात छत्तीसगढ़ उत्तरप्रदेश में और महाराष्ट्र मे संविधानिक अधिकार से वंचित रखा गया है. ईसका अर्थ और मतलब समझने की जरूरत है. यह सब अभी और आज क्यों हो रहा है. चालीस साल तक किसी ने कुछ नहीं कहा. गत 2/3 साल से ईस बात को कौन हवा दे रहे हैं? गोरमाटी बंजारा लंबाडा सुगाली, गवारीया, गोर को जमाती को शिक्षा संपत्ति से वंचित रखने का यह खेल कौनसी शक्तियां खेल रही है.? नोव्हेंबर 2017 मे राजस्थान सरकार ने गुर्जर और गुज्जरो को मुल विमुक्त घुमंतू जनजाति मे समाविष्ट करने की शिफारस राष्ट्रीय विमुक्त घुमंतू आयोग को की है. ईसका अर्थ समधना भी जरूरी है. महाराष्ट्र के लोग ईन सभी बातों से पहले ही पिडीत है. आप सभी मान्यवर सामाजिक संगठनों के प्रमुख, बुध्दिजीवी और सामाजिक सुझबुझ रखने वाले सभी राजनीतिक नेता कार्यकर्ता और लोकप्रतिनीधीं यो को ईसपर गंभीरता से सोचना चाहिए. समता स्वतंत्रता बंधुता और न्याय के लिए भारतीय संविधान के अनुसार समाज को संवैधानिक अधिकार मिलना ही चाहिए.:

जयसेवालाल जयसंविधान जयभारत

अंबरसिंग बन्सी चव्हाण.

महासचिव भारतीय बंजारा समाज कर्मचारी सेवा संस्था.

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