“यज्ञ के बहाने से ढौंगी पूरोगामी समाज को भ्रमित कर रहे है”?

Banjarar gormati painting
​यज्ञ के बहानेसे ढोंगी पूरोगामी समाज को भ्रमित कर रहे है?

 

पूरोगामी कहने वाले लोग  लक्षचंडि यज्ञ को लेकर बहूत चिंतित हो रहे है,दुःखी हो रहे है,शरीर को मन को कष्ट दे रहे है।अभी हिंदू धर्म के प्रति उनका आक्रोश पैदा हो रहा है।जाने,अनजान मे क्या कर बैटेंगे पता नही। अरे भाई  यज्ञ करना वो हिंदू धर्म का मामला है।वो जो चाहें वो करे।आप उनके लपडे मत पडो। उनको भी संविधान ने धर्म प्रचार का आयोजन करने का अधिकार दिया है।

समाज के दरवाजे पूरोगामि वाले के लिए खुले है।तांडा मे जाकर सचाई का पाठ पडावो,सही क्या है गलत क्या है उन्हें अवगत करवा के दो। अगर तुम उन्हें आज कहेंगे तुम हिंदू नहीं है , वो तो बावले हो जाएंगे संत को अगर भोंदू कहेंगे तो उनके मन मे विकार,क्रोध उत्पन्न होगा। वो तुमारी लूडबूड बातो मे नहीं आऐगे। हिंदू धर्म के प्रति उनकी आस्था है,संत के प्रति उनकी श्रद्धा है।

वाणी से सा शरीर से कोई दूष्कर्म मत करो।नही तो अस्मिता को चोट पहुचाने के बदले दंड तुम्हें भोगना पड़ेगा।

तथाकथित  पूरोगामी कहने वाले लक्षचंडि यज्ञ का विरोध बुद्धि के स्तर पर करने के बजाय अपने भटके हुए मन के  साथ आक्रोश भरा व्यवहार कर रहे है। उनका मन उनके वष मे नहीं है।

सच्चाई ये है की,उनका मन भटक रहा है।मन बड़ा चंचल है, एक जगह पर यज्ञ को विरोध है। वही दुजी और भोगविधी का समर्थन करता रहता है। उनका मन बार बार भटकता है। मन भटकना यह स्वभाव हो गया।मन को वष मे करना हमारा कर्तव्य है फिर भी हम मन को वष मे नहीं कर सकते

मन की,गहराई मे जाकर कीतना क्रोध है,द्वेष है,इर्षा है,अहंकार है,इन अलग अलग विकारो से मन भरा हुआ है।

यज्ञ को लेकर पूरोगामी कहने लगे हमारा समाज हिन्दू धर्म नही है।फिर है क्या? इस का ठोस उत्तर पूरोगामी के पास नहीं है। अगर है तो उसका सही ढंग से प्रचार करे। घृणा के बीज बोना यही आद्यकर्तव्य ढोंगी पुरोगामी मान रहे है।

हमारे लोग हिंदू धर्म मान रहे है। उदाहरण के तौर पर पूरोगामी के बाप अपने बेटे के दाखिला पर जात-बंजारा धर्म हिंदू लिखते है।अब देखो पूरोगामी कहने वाले अपने बेटा -बेटी  के दाखिला पर जात-बंजारा धर्म हिंदू लिखा है।पहीले भाई कम से कम अपने बेटा  बेटी  के दाखिला पर धर्म हिंदू निकालो।फिर  हिंदू धर्म के लक्षचंडी यज्ञ का विरोध करो।

मैं उदाहरण के तौर पर विश्लेषण कर रहा हूं।एक साल पहले वाशिम में अ.भा. गोर बंजारा साहित्य सम्मेलन हुआ।उस साहित्य सम्मेलन मे कौन कौन लोग मंच पर विराज मान थे।साहित्य सम्मेलन के दूसरे दिन क्या हुआ।गोर बंजारा विचारों के अलावा कौन कौन से विचारधारा का उदात्तीकरण वहाँ प्रकट हुआ।

दूसरा सवाल:नागपुर मे होने वाला दूसरा अ.भा.गोर बंजारा साहित्य सम्मेलन की तारीख  14 अप्रैल ही क्यों?

तीसरा सवाल : लक्षचंडी यज्ञ को विरोध करने वाले का चेहरा वोही है जो बार-बार पुरोगामी नाम से समाज के सामने आ रहे है। यह जो लोग है गैर समाजिक संघटन के साथ जुड़े हुए हैं।समाज के कोई सामाजिक संघटन के साथ इनका कोई सक्रिय संबंध नहीं है।मैं आप को विश्वास दिलाना चाहता हूं मुझ पर विश्वास करे या ना करे लेकिन ये जो लोग कह रहे है की हम परिवर्तनवादी है।इन का उद्देश्य  समाज  परिवर्तन  नहीं,धर्म  परिवर्तन है। समाज विकास की एक भी बात यह लोग करते नही . घृणा का प्रचार ही करते है.

????जय सेवालाल????

—अशोक पवार नागपुर

(9850441005)

सौजन्य

गोर कैलास डी.राठोड

 

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