“महिलाओं को मुख्य प्रवाह मे लाना चाहिए”- सुखी चव्हाण

गोर माटी जागो
क्या महिलाओ को मुख्य प्रवाह में लाना चाइये?
आज सभी जगह विमुक्त जमाती का उजागर
करनेकी चर्चा हो रही है परंतु समाजके महिलाओ के बारेमे कोई विशेष रूप से काम नहीं हो रहा है महिलाओ को मुख्य प्रवाह में लाने की आवश्यकता है उने सक्षम बनानेके लिए कोई विशेष काम नहीं हो रहा आप
बुद्धि जीवी  समाज  हो ,आपका दायित्व है उने भी ज्ञान देना जरुरी है आप उत्सव मना रहे हो तो साथ में महिलाओ को साथ में लाना जरुरी है नही तो उन्हें  विमुक्त जमाती के प्रश्न पता नहीं चलेगा क्या अपने संतान को बताएगी कैसा है हमारा समाज
ब्रिटिश सरकारने हमे गनुहागर समाज घोषित कर के ओपन जेल यानि सेटलमेंट्स में क्यों रखा क्या क्या हमने सहा कैसे हमें दिन में दो बार गाओ के मुख्या के पास हजेरी देनी पड़ती थी पंडित नेहरूजीने 31 अगस्त 1952 में विमुक्त करदिया
लेकिन आज भी महिलाये मुक्त नहीं हुई आज भी बुद्धि जीवी उन्हें बंदी बनाये हुए नजर आ रहे है घर परिवार में बांद दिया है क्या ये ही
विमुक्त की परिभाषा है?  मेरा मानना है
की जबतक महिला अपने चौराहे के बाहर नही निकलेगी तब तक परिवर्तन नामुमकिन है
व्रत वैकल्य और परीवार का बोज़ उठाते हुए
पूरा जनम व्यतीत हो रहै  अपना समाज इसके बारेमे  सोचेगा क्या?
आप बुद्धि जीवी कहलाते हो तो महिलाओका
इस प्रवाह में लाना उचित है क्या?
कृपया विचार विमर्श और  आपका अभिप्राय
दीजिये
—-मा.सुखी चव्हाण
बदलापुर मुंबई

– गोर कैलास डी राठोड
बंजारा आँनलाईन न्यूज पोर्टल,
www.goarbanjara.com

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