“गोर बंजारा विश्वकल्याणकारी” 

“​जय गोर…जय सेवालाल…जय वसंत”    

गोर बंजारा — विश्वकल्याणकारी”

जसो वैदिक लोकसाहित्येम विश्वेर मंगल करेर कामना करमेलेच।

सर्वे भवन्तु सखिन: सर्वे सन्तु निरामया: ।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिददुःखभागभवेत ।।

(पृष्ठ : 1.4.14-बृहदाअरण्यका उपनिषद)       〰〰〰〰〰〰〰

वोर अनुरुप बंजारा लोकगीदेमभी  अभिव्यक्त भक्ति साहित्य लोकमंगल अन विश्व मंगलेर कामना करेवाळो गोर यी लोक गणेर धरतीपरेर ऐकमेव समूह  छ.  प्रत्येक गोर बंजारा भक्त प्रकृति, देवी, संत सेवालालेर प्रति स्वतान समर्पित छ.पृथ्वीपरेर जिव-जन्तु, पशु-पक्षी, (पखेरु)झाड झडुपला- गावडी -बळद खेत -खेतारी , जिनगाणींन, नानक्या -मोठो,कीडी-मुंगी,बाल-बच्या, बाई-माणंस ये से चराचेम वासकरेवांळेन ” सेन साईं वेस”यी  विश्व मंगलेर कामना करतो आरोछ.
आपंणो गोर गणेर समुह देवीर सम्मुख वेंन अरदास करतो आरोच…-यी मानवतावादी वीचार आत दकान पडच.
”जय तळजा भवानी,
आदिमाया शक्ति जगत जननी
याड़ी साहेबणी सेन साईं वेस ।
काळे मातेर मनक्या छा चुक जांवाचा
चुक भूल माफ कर याडी
तारे गोर बंधान
नानक्या मोठेन साईवेस ।
नगरीन साईवेस
याडी ये धरती पर रेयेवाळ
जीवजंतु कीड़ा मुंगीन साईवेस याडी
कोर गोरेन साईवेस
बाळ-गोपाळेन साईवेस ।
जो भगत तार नाम स्मरीय
ओन साइवेस याड़ी ।
तारे गोर बंधान
अन्ने-धनेति भरपूर रकाड,
धंधे पानीम यश द याडी ।
जत संकट आय वत हजर वेजायेस
तारे भगतेन तारलेस याड़ी ।
जीव-जणगाणीर साइवेस याड़ी ।
वांजडीरो गोदो भर देस
तार गोरबंधा कस्ट करेवाळ छ
ओन भूको मत रकाडेस याड़ी
सत्ये काम फत्ते करेस
जिन्दगीर नैया पार लगायेस

” अन” ई ..

पूजा तारे देवळेम मंजूर करलेस याड़ी

सा…ई ..वेस , याड़ी साहेबणी।।               संकलन–प्रा.दिनेश सेवा राठोड~ सौजन्य:- गोर कैलास डी राठोड

गोर बंजारा आँनलाईन न्यूज पोर्टल मुंबई महाराष्ट्र राज्य.

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