गजानन डी राठोड

दोस्तों कर्म का फळ। यांनी
जैसी करनी वैसी भरनी।
यह सारी बातें हमें इसी जनम मे ही मिलती है।
यह हम सभी को पता रहने के बावजूद भी हम जानबूझकर गलतियाँ, निंदा, और किसी के उपर अत्याचार करते है।यह क्यूँ? हमे तो परमेश्वर ने एक बुध्दीमान प्राणी के रूप मे प्रकट किया है।तो भी हम ऐसा क्यूँ करते है।दोस्तों हम अगर बुराइयाँ करते है।तो निश्चित ही हमारे साथ बुरा ही होगा।और हम कुछ अच्छा कर्म करगें तो हमारे साथ अच्छा ही होगा।
दोस्तों हमें कुछ करना है तो इसी जनम मे करना होगा।किसको पता है।कि हम आगले जनम मे भी मनुष्य के रूप मे ही जनम लेंगे।इसीलिए मै कहता हुँ।
की अच्छा कर्म करो और अच्छाइयों के साथ रहो
जो मनुष्य कुछ अच्छा करना चाहता है।उस मनुष्य को प्रोत्साहन दो तो उनकी कार्य करने की गती बढ सकतीं है।और जो मनुष्य कुछ बुरा कार्य कर रहा हो उनका साथ छोडदो तो उनका कार्य करने क्षमता कम हो सकती है।किसीने खुब कहाँ है।जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे।देखा जाएँ तो आज की स्थिति बुरी रहने के बाद भी ठिक है।मगर दिन ब दिन बुराइयाँ बढ़ती जा रही है।इसे हमें रोखना होगा।वह कैसे हमें सूरवात आपने आपसे करनी होगी।जब तक हम खुद मे बदलाव नही ला सकते तब तक हम कुछ भी हसील नही कर सकते।यही सच्चाई है।
जुडो समाज से और जोडो समाज को एक दिन ऐसा भी हो सकता है।की इतिहास का एक पन्ना आपके कार्यो से भरा होगा।बस मुझे इतना ही कहना है। सोच बदलो दुनिया आपने आप बदल जायेगी।
धन्यवाद…..

जय सेवालाल

समाजहित चिंतक
गोर गजानन डी राठोड
स्वयंसेवक
जी.बी.एस.एस.भारत.
9619401377

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