“आचरण में अस्थिरता कि अवश्य्यकता”

आचरण मे स्थिरता कि आवश्यकता
मेरे जातिके समंजस तथा समाज हित से प्रेरित

बन्धुओसे अनुरोध है की ,आज हम देख रहे है

हम समाज सुधार हेतु कुछ सभा आयोजित

करते है!वहा उपस्तिति नही के बराबर होती

है मोर्चा आयोजित किया लेकिन उदासीनता

नज़र आई ,इसका आत्मपरीक्षण होना ही चाहिये !

केवल ज्ञान देनेसे और कथनी से क्या होता है! आचरण में स्थिरता  होनी चाहिये

जैसे काग़ज़ का महल देखते ही गिर पड़ता है, वैसे आचरण रहित मनुष्य शीघ्र पतित होता है। समाज के रुकावट के लगाए गये निर्बंध जैसे जातिका दाखिले के लिए1961 का दाखिला क्रीमलेयर ,शिक्षा,आरोग्य,बालिकाओपे होनेवाले अत्याचार के बारेमे जो भी चिकित्सा करनी है !जो समाज के प्रति जिसे आस्था है उन्हीके साथ चर्चा करे तो समाजके लिये लाभदायक होगा !आप आगर कोई भी ग्रुप मे चर्चा कि तो आपकी पिडा हर कोई नही समज पायेगा .

हमे अभि पता लग चुका है कुछ नेता गण हमे राह से भटका रहे है!

हमे उनके मूर्खता का प्रमाण दे रहे है हकीगत ये है कि हम उन्हें स्वीकार कर भी रहे है ये हमारी शोकांतिका है हमे ईनका विरोध नही

करना बल्कि उन्हें उनकी जगह दिखाना समजदारी होगी!
यदि कोई व्यक्ति मूर्ख है, तो उसका विरोध करके आप व्यर्थ ही अपनी उर्जा नष्ट न करें।

इसलिए  इनसे किसी भी तरह कि अपेक्षा

करना  नही चाहिये  लेकिन हम हर बार गलती करते नजर आ रहे है!

अगर आप समय पर अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते है तो आप एक और गलती कर बैठते है| आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते है जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करेंगे !

हमारा समाज ये चाहता  है बेफिजूल आस्था दिखानेवालोको संघर्ष ,टायगर,गोर सेना , मिशन  जैसे सभी संघटन से दूर रखे

बार बार नेताजी को क्या लगेगा इसलिए इ्मोशनल सपोर्ट करते है कोई खुद विचार नही कर रहा की क्या समाज हित किसमेे है

भीड़ इकट्टा कर के समस्या हल नही होगी!

भीड़ भी अनेक जाती के लिए किया तो क्या होगा हर समाज की मांगे अलग है उन्हें बंजारा समाज के दशा तथा दिशा से नही जोड़ा सकता प्रार्थमिक जरूरत क्या है इसका विचार होना जरूरी है! कुछ समस्या सांविधानिक है उसे न्यायिक व्यवस्था से लड़ना भेहत्तर होगा .कुछ समस्या राजकीय

स्तर पर लड़नी है वहा मोर्चा तथा हड़ताल

से लड़ना चाहिए
हमारे विचार अगर सही है निस्वार्थ है तो जितनी भी संघटन के उच्य पदाधिकारिओ से अनुरोध कि आप राजनीती से जुडे नेता गण

से परे रह कर एक अराजकीय  सभा का आयोजन करिये अभि ये मत सोचना कि पहल

कौन करेगा हम चाहते है कि पहल हर कोई करेगा सिर्फ सबको समजने की मानसिकता होनी चाहिए!
आज समाज जागृत हो रहा है बस  आप उनके

करीब जाके दिशा दिखानी है !देको फिर संत  सेवालाल महाराज का जयजय कार होगा

सफेद रंग का पवित्र झंडा हाथ में थमानेकी

जबाबदारी जिन्होंने समाज सुधार का बीड़ा उठाया उनका है! अभी रुकना नही कथनी की बजाय निचला स्तर से काम करना है
कोई भी संघटन आर्थिक रूप से मजबूत

करनेके लिए भी सोच होनी चाहिए

—-सुखी चव्हाण,बदलापुर

9930051865

गोर कैलास डी राठोड

बंजारा आँनलाईन न्युज पोर्टल,

website, m.goarbanjara.com

Leave a Reply